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उदियमान भगवान भास्कर को अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ

Chhath, the great festival of folk faith, concluded with Arghya to the rising Lord Bhaskar.

पटना: लोक आस्था का महापर्व छठ, जिसे सूर्य उपासना का सबसे पवित्र और कठिन व्रत माना जाता है, उदियमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने के साथ सम्पन्न हो गया। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को चार दिनों तक चलने वाले इस व्रत के अंतिम दिन व्रतियों ने आज उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और अपनी पूजा को पूर्ण किया।

सूर्योपासना का महापर्व

छठ पूजा में सूर्य देवता की आराधना कर उनसे सुख, शांति, संतान और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है। इस पर्व में महिलाएं और पुरुष दोनों ही कठोर नियमों का पालन करते हैं। व्रतियों ने नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों में सूर्य देवता के सामने खड़े होकर अर्घ्य अर्पित किया और भगवान से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।

व्रत के चार पवित्र दिन

चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, जिसमें व्रती शुद्धता का ध्यान रखते हुए गंगा जल से स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन खरना का आयोजन होता है, जिसमें गुड़ और चावल से बने प्रसाद का सेवन किया जाता है और फिर व्रती निर्जल व्रत का पालन करते हैं। तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया जाता है, जिसे ‘सांध्य अर्घ्य’ कहा जाता है। अंतिम दिन उदियमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन होता है।

सभी ने मांगी सुख-समृद्धि की कामना

व्रतियों ने घाटों पर एकत्र होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया और भगवान भास्कर से अपनी, अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस अवसर पर घाटों को सजाया गया और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं ने पूजा के दौरान घाटों पर गाए जाने वाले पारंपरिक छठ गीत गाए, जो इस पर्व के वातावरण को और भी भावपूर्ण बना रहे थे।

संपूर्ण बिहार में हर्षोल्लास का माहौल

बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में इस पर्व का विशेष महत्व है। छठ पूजा का आयोजन सिर्फ घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी समुदाय मिलकर इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

Chhath, the great festival of folk faith, concluded with Arghya to the rising Lord Bhaskar.

 

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