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चैत्र नवरात्रि: वैदिक महत्व और मां दुर्गा के आलौकिक मंत्रों की ज्योति

Chaitra Navratri: Vedic significance and the light of divine mantras of Maa Durga

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू सनातन धर्म में आध्यात्मिक ऊर्जा, शक्ति की उपासना और नवजीवन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह नौ दिवसीय उत्सव मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का काल है, जिसमें साधक तप, मंत्र साधना और भक्ति के माध्यम से दिव्य कृपा प्राप्त करते हैं। वैदिक ग्रंथों में इसका गहरा महत्व बताया गया है, जहां नवरात्रि को नवग्रहों के शुभ प्रभाव, आत्मशुद्धि और दैवीय शक्ति के जागरण का समय माना गया है।

वैदिक परंपरा में नवरात्रि का महत्व
ऋग्वेद, मार्कंडेय पुराण और देवी भागवत में वर्णित कथाओं के अनुसार, नवरात्रि में देवी दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षसों का वध किया था। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की प्राप्ति और अंधकार पर प्रकाश के विजयोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

वैदिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संचार अधिक सक्रिय होता है। इसलिए, कलश स्थापना, नवग्रह पूजा, अखंड दीप और सप्तशती पाठ जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। जौ के अंकुरण (जवारे) को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जो देवी की कृपा दर्शाता है।

मां दुर्गा के स्वतः सिद्ध मंत्र
मंत्र साधना नवरात्रि का प्रमुख अंग है। देवी के इन मंत्रों का जप करने से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति और भौतिक सफलता प्राप्त होती है।

1. सर्व बाधा विनाशक मंत्र
“सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥”
(इस मंत्र के जप से सभी बाधाएं दूर होती हैं और धन-धान्य की प्राप्ति होती है।)

2. दुर्गा द्वादश नाम स्तोत्र
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
(यह मंत्र देवी के सर्वव्यापी शक्ति स्वरूप को प्रणाम करता है।)

3. श्री दुर्गा अष्टाक्षरी मंत्र
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥”
(यह अष्टाक्षरी मंत्र दुर्गा की रक्षात्मक शक्ति को जागृत करता है।)

4. कात्यायनी मंत्र (कन्या पूजन हेतु)
“ॐ कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी।
नंदगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥”
(यह मंत्र कुंवारी कन्याओं के रूप में देवी की पूजा करने हेतु उत्तम है।)

चैत्र नवरात्रि न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि आत्मशुद्धि, तप और साधना का महाकाल भी है। मां दुर्गा के इन मंत्रों के नियमित जप से भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा, मानसिक शक्ति और दैवीय कृपा की प्राप्ति होती है। इस पावन अवसर पर हम सभी देवी के आशीर्वाद की कामना करते हैं।

“या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”

Chaitra Navratri: Vedic significance and the light of divine mantras of Maa Durga
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