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हर नए मोबाइल में ‘Sanchar Saathi’ ऐप अनिवार्य, निजता बनाम सुरक्षा पर छिड़ा सियासी संग्राम!

हर नए मोबाइल में 'संचार साथी' ऐप अनिवार्य, निजता बनाम सुरक्षा पर छिड़ा सियासी संग्राम!

नई दिल्ली: देश में बिकने वाले सभी नए और आयातित मोबाइल हैंडसेट में अब सरकार का ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) मोबाइल एप्लिकेशन प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य कर दिया गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा जारी इस निर्देश ने साइबर सुरक्षा और नागरिक निजता (Privacy) के बीच एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें विपक्ष ने इसे ‘जासूसी’ का उपकरण बताया है, जबकि सरकार ने इसे डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए ‘सुरक्षा कवच’ करार दिया है।

दूरसंचार विभाग (DoT) ने सभी मोबाइल हैंडसेट निर्माताओं और आयातकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भारत में उपयोग के लिए बनने या आयात होने वाले सभी मोबाइल फोन में ‘संचार साथी’ ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए।

सरकार का तर्क: साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी पर लगाम

सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud), फर्जी आईएमईआई (IMEI) नंबर और चोरी हुए मोबाइल फोन के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए ज़रूरी है।

DoT के आंकड़ों के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म की मदद से अब तक 7 लाख से अधिक चोरी/गुम हुए फोन बरामद किए जा चुके हैं, जो इसकी प्रभावशीलता को दर्शाता है।

विपक्ष का आरोप: ‘निजता का उल्लंघन’ और ‘जासूसी’

सरकार के इस कदम पर विपक्षी दलों और तकनीकी विशेषज्ञों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका मुख्य आरोप है कि यह नागरिकों की निजता के मौलिक अधिकार (Fundamental Right to Privacy) का उल्लंघन है और यह ऐप सरकारी निगरानी (surveillance) का एक उपकरण बन सकता है।

विवाद बढ़ने के बाद, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि ‘संचार साथी’ ऐप को डाउनलोड करना अनिवार्य नहीं होगा और उपयोगकर्ता इसे हटा भी सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐप उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए है और इससे किसी की जासूसी नहीं होगी। हालांकि, DoT के मूल निर्देश में इसे डिलीट या डिसेबल न कर पाने की बात कही गई थी, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है।


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