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तंबाकू प्रेमियों को लगेगा बड़ा झटका: 1 फरवरी से सिगरेट, बीड़ी और पान मसाला पर भारी टैक्स

सेहत और जेब दोनों पर वार: अब 40% GST के साथ सिगरेट और गुटखा

सेहत और जेब दोनों पर वार: अब 40% GST के साथ सिगरेट और गुटखा

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता 31 दिसंबर, 2025

केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों और पान मसाला के शौकीनों के लिए साल के अंत में एक बड़ा झटका दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, 1 फरवरी 2026 से देश में सिगरेट, बीड़ी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का ढांचा पूरी तरह बदलने जा रहा है। सरकार ने इन ‘सिन गुड्स’ पर GST की दर बढ़ाकर 40% कर दी है और साथ ही कई नए उपकर (Cess) लागू कर दिए हैं।

GST कंपनसेशन सेस की जगह लेगा ‘एक्साइज और हेल्थ सेस’

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना (दिनांक 31 दिसंबर 2025) के अनुसार, अब तक तंबाकू उत्पादों पर लगने वाला ‘GST क्षतिपूर्ति उपकर’ (Compensation Cess) समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर अब अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Additional Excise Duty) और स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Health and National Security Cess) लगाया जाएगा।

यह बदलाव राजस्व जुटाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकार का तर्क है कि इन हानिकारक उत्पादों पर लगने वाले टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।


प्रमुख बदलाव: आपकी जेब पर कितना होगा असर?

नए टैक्स ढांचे के कारण अलग-अलग उत्पादों की कीमतों में भारी बदलाव की उम्मीद है:


क्यों लिया गया यह फैसला?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस कदम के पीछे दो मुख्य कारण हैं:

  1. राजस्व में वृद्धि: GST कंपनसेशन सेस की अवधि समाप्त होने के बाद, केंद्र सरकार अपने राजस्व को सुरक्षित करना चाहती थी। नए उत्पाद शुल्क के माध्यम से सरकार को सीधा नियंत्रण और निरंतर आय प्राप्त होगी।
  2. तंबाकू नियंत्रण: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) लंबे समय से भारत सरकार पर तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाने का दबाव बना रहा था ताकि इनकी खपत कम हो सके।

शेयर बाजार में मची हलचल

सरकार की इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में तंबाकू और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। आईटीसी (ITC), गॉडफ्रे फिलिप्स और वीएसटी इंडस्ट्रीज जैसे बड़े ब्रांड्स के शेयरों में 5% से 7% तक की बिकवाली दर्ज की गई। निवेशकों को डर है कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी से इन उत्पादों की मांग में कमी आ सकती है।


नोट: नए नियम 1 फरवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगे। व्यापारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पुराने स्टॉक पर नई एमआरपी (MRP) के स्टिकर लगाने की प्रक्रिया समय रहते पूरी कर लें।

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