भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) का ऐतिहासिक कदम: 60 साल की विरासत के बाद पहली बार शुरू हुआ Ph.D. पाठ्यक्रम
IIMC के 60 साल के इतिहास में नया स्वर्णिम अध्याय!
नई दिल्ली | 03 जनवरी, 2026
भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), जिसे हाल ही में ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा प्राप्त हुआ है, ने अपने 60 वर्षों के शानदार शैक्षणिक सफर में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। संस्थान ने 1 जनवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर अपने पहले पीएच.डी. (Ph.D.) कार्यक्रम की घोषणा की। यह कदम न केवल संस्थान के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि देश में मीडिया शोध और नवाचार के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने वाला माना जा रहा है।
प्रवेश प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए प्रवेश की खिड़की खुल चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी ‘फुल-टाइम’ और ‘पार्ट-टाइम’ दोनों श्रेणियों में आवेदन कर सकते हैं।
- आवेदन की अंतिम तिथि: ऑनलाइन पोर्टल 30 जनवरी 2026 तक खुला रहेगा।
- चयन प्रक्रिया: UGC-NET योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों को सीधे साक्षात्कार (Personal Interaction) के लिए बुलाया जाएगा। वहीं, बिना नेट योग्यता वाले पार्ट-टाइम उम्मीदवारों के लिए 15 फरवरी 2026 को प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी।
- परिणाम और साक्षात्कार: चयनित उम्मीदवारों की सूची 23 फरवरी को जारी होगी, जिसके बाद 9 मार्च से साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू होगी।
- सत्र का आरंभ: पूरी प्रवेश प्रक्रिया 27 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और 1 अप्रैल 2026 से शोध कार्य (Coursework) का विधिवत शुभारंभ होगा।

‘ज्ञान वृक्ष’ के साथ नई शुरुआत
इस ऐतिहासिक अवसर पर आईआईएमसी की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर ने नई दिल्ली परिसर में ‘कोविदार’ का पौधा लगाया, जिसे उन्होंने ‘ज्ञान वृक्ष’ की संज्ञा दी। यह वृक्ष संस्थान की शोध यात्रा और ज्ञान के विस्तार का प्रतीक बनेगा।
कुलपति डॉ. गौर ने जोर देकर कहा कि इस पीएच.डी. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘पुनरुत्थानवादी भारत’ (Resurgent India) के लिए शोध में योगदान देना है। उन्होंने शोधार्थियों को ‘आउट-ऑफ-द-बॉक्स’ सोचने और ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जो समाज और राष्ट्र निर्माण में प्रत्यक्ष भूमिका निभा सकें।
शोध के व्यापक क्षेत्र: पारंपरिक से आधुनिक मीडिया तक
IIMC का यह डॉक्टरेट कार्यक्रम केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतःविषय (Interdisciplinary) दृष्टिकोण पर आधारित है। शोधार्थी निम्नलिखित क्षेत्रों में गहन अध्ययन कर सकेंगे:
- डिजिटल मीडिया और रणनीतिक संचार: उभरती तकनीकों और सूचना प्रवाह का विश्लेषण।
- मीडिया उद्योग प्रबंधन: मीडिया संस्थानों की कार्यप्रणाली और व्यावसायिक मॉडल पर शोध।
- विकास संचार और राजनीतिक संचार: लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका।
- फिल्म अध्ययन और विज्ञापन: सिनेमाई विमर्श और जनसंपर्क (PR) के बदलते आयाम।
क्यों खास है यह पहल?
अब तक IIMC मुख्य रूप से अपने डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए जाना जाता था, जहाँ से निकले छात्र आज देश-दुनिया के बड़े मीडिया घरानों का नेतृत्व कर रहे हैं। पीएच.डी. शुरू होने से अब यह संस्थान ‘मीडिया थिंक टैंक’ के रूप में उभरेगा। यहाँ होने वाला शोध भारतीय मीडिया की चुनौतियों, फेक न्यूज के संकट और वैश्विक संचार के दौर में भारतीय दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करेगा।
“हमारा लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं है, बल्कि ऐसे विद्वान तैयार करना है जो संचार के बदलते परिदृश्य में वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकें।” – डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर, कुलपति