भारत की 5,000 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत को मिला नया जीवन
पोर्बंदर से मस्कट तक भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा का गौरवशाली अध्याय एक बार फिर जीवंत हुआ, जब भारतीय नौसेना का पारंपरिक पोत INSV कौंडिन्य ने अपनी पहली (मेडन) समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की। यह ऐतिहासिक यात्रा न केवल भारत की 5,000 वर्ष पुरानी समुद्री विरासत का प्रतीक बनी, बल्कि भारत–ओमान के गहरे सभ्यतागत संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करती है।
प्राचीन तकनीक से बना आधुनिक गौरव
INSV कौंडिन्य का निर्माण प्राचीन “सिलाईदार तख्ती (Stitched-Plank)” तकनीक से किया गया है, जिसमें लकड़ी के तख्तों को लोहे की कीलों के बजाय नारियल के रेशों से सिला जाता था। यह वही तकनीक है, जिसका उल्लेख और चित्रण अजंता की गुफाओं में देखने को मिलता है।
यह पोत भारत की पारंपरिक जहाज निर्माण कला, कारीगरी और समुद्री ज्ञान का जीवंत उदाहरण है, जिसे आधुनिक काल में पुनर्जीवित किया गया है।
भारत–ओमान के 70 वर्षों के रिश्तों को समर्पित
INSV कौंडिन्य की यह यात्रा ऐसे समय में पूरी हुई है, जब भारत और ओमान अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से भारत और ओमान के बीच व्यापार, संस्कृति और समुद्री संपर्क अत्यंत प्राचीन रहे हैं। यह यात्रा उन सभ्यतागत संपर्कों की स्मृति को फिर से उजागर करती है, जो सदियों पहले हिंद महासागर के माध्यम से स्थापित हुए थे।
समुद्री विरासत और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
भारतीय नौसेना और संस्कृति मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, पारंपरिक ज्ञान और आत्मनिर्भर भारत की भावना को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। INSV कौंडिन्य यह संदेश देता है कि भारत न केवल आधुनिक तकनीक में अग्रणी है, बल्कि अपनी प्राचीन परंपराओं को सहेजने और आगे बढ़ाने में भी सक्षम है।
इतिहास से भविष्य की ओर
INSV कौंडिन्य की यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाली पीढ़ियों को भारत की समृद्ध समुद्री संस्कृति से जोड़ने का कार्य करेगी। यह पोत केवल एक जहाज नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत और आत्मविश्वासी भविष्य का सेतु है।



