नई दिल्ली | 04 जनवरी, 2026
भारत के सांस्कृतिक इतिहास में 3 जनवरी का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भव्य अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी “द लाइट एंड द लोटस: रिलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” का उद्घाटन किया। यह अवसर केवल एक प्रदर्शनी की शुरुआत नहीं, बल्कि भारत की उस विरासत की घर वापसी का उत्सव है जो सवा शताब्दी से देश से दूर थी।
प्रधानमंत्री का संबोधन: “धरोहर की घर वापसी”
प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भावुक और गौरवान्वित नजर आए। उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा:
“125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, भारत की विरासत वापस लौट आई है और देश की अनमोल थाती अपने घर वापस आ गई है। आज से भारत के लोग भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।”
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि ये अवशेष केवल पुरातत्व की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये भारत की आध्यात्मिक चेतना और ‘बुद्ध धम्म’ के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक हैं।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और कूटनीतिक सफलता
इस ऐतिहासिक आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पिपराहवा अवशेषों (Piprahwa Relics) का पुनर्मिलन है। 1898 में कपिलवस्तु (पिपराहवा) की खुदाई के दौरान मिले इन अवशेषों को 127 वर्षों के बाद एक साथ लाया गया है। इसमें 1972-75 की खुदाई के निष्कर्ष, कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में संरक्षित खजाने और पेपे परिवार (Peppé family) के पास मौजूद वे दुर्लभ अवशेष शामिल हैं, जिन्हें जुलाई 2025 में भारत सरकार के निर्णायक हस्तक्षेप के कारण विदेश में नीलामी से रोककर वापस लाया गया था।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि मोदी जी में भारत की आत्मा को शासन के कार्यों में अनुवादित करने की दुर्लभ क्षमता है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक कूटनीति की एक बड़ी जीत बताया।
प्रदर्शनी की मुख्य विशेषताएं: “द लाइट एंड द लोटस”
संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक की 80 से अधिक असाधारण वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं।
- मुख्य आकर्षण: वह विशाल पत्थर की मंजूषा (Monolithic Stone Coffer) जिसमें मूल रूप से पवित्र अवशेष पाए गए थे।
- प्रदर्शित वस्तुएं: दुर्लभ मूर्तियां, प्राचीन पांडुलिपियां, थंका पेंटिंग्स, अनुष्ठानिक वस्तुएं और जवाहरात से जड़े अवशेष पात्र।
- सांस्कृतिक गतिविधियां: प्रधानमंत्री ने पिपराहवा स्थल से खुदाई में मिली एक प्राचीन मुहर को प्रतिष्ठित किया और परिसर में बोधि वृक्ष का पौधा लगाया।
सांख्यिकीय उपलब्धि: विरासत का पुनरुद्धार
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत की सांस्कृतिक संपत्ति को वापस लाने के प्रयासों में अभूतपूर्व तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार:
| अब तक वापस लाई गई पुरावशेषों की संख्या | 642 |
| पिपराहवा अवशेषों का अंतराल | 125-127 वर्ष |
| प्रदर्शनी में शामिल कलाकृतियां | 80+ वस्तुएं |
| आयोजन स्थल | राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, दिल्ली |
वैश्विक उपस्थिति और आध्यात्मिक संदेश
उद्घाटन समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और विभिन्न देशों के राजदूत उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं को ‘चीवर दान’ किया और आगंतुक पुस्तिका में अपने विचार साझा किए।
यह आयोजन इस बात की पुष्टि करता है कि भारत अब अपनी सभ्यतागत विरासत को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि उसे विश्व पटल पर गौरव के साथ स्थापित कर रहा है। भगवान बुद्ध के अवशेषों का यह पुनर्मिलन भारत की उस अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है जिसके तहत वह अपनी खोई हुई सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित कर रहा है।



