
माजुली द्वीप, असम (भारत): प्रकृति प्रेम और दृढ़ संकल्प की एक अनूठी मिसाल कायम करते हुए असम के जादव “मोलाई” पायेंग ने 37 सालों तक लगातार रोज एक पेड़ लगाकर एक विशाल जंगल खड़ा कर दिया है। आज यह जंगल न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क से दोगुना बड़ा है और यहां कई प्रजातियों के जानवरों और पक्षियों ने अपना आशियाना बना लिया है।
एक छोटी सी शुरुआत, एक बड़ा सपना
1980 में, जब जादव पायेंग महज 16 साल के थे, तब उन्होंने माजुली द्वीप पर बाढ़ के बाद बहकर आए सैकड़ों मरे हुए सांपों को देखा। यह नज़ारा देखकर उनका दिल दहल गया। उन्होंने सोचा कि अगर यहां पेड़ होते, तो शायद यह त्रासदी नहीं होती। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी मुहिम शुरू की और रोजाना एक पेड़ लगाने का संकल्प लिया।
अकेले की मेहनत, सैकड़ों की विरासत
बिना किसी सरकारी मदद के जादव ने अपने हाथों से बांस, सागौन, अर्जुन और कई दूसरे पेड़ लगाए। धीरे-धीरे उनका यह प्रयास रंग लाया और आज वह जगह “मोलाई फॉरेस्ट” के नाम से मशहूर है, जो करीब 1,360 एकड़ में फैला हुआ है। यह जंगल न सिर्फ हरा-भरा है, बल्कि यहां बाघ, गैंडे, हाथी, हिरण और कई प्रवासी पक्षियों ने अपना ठिकाना बना लिया है।
मिले सम्मान, पर बने रहे साधारण
जादव पायेंग को उनके अद्भुत योगदान के लिए पद्मश्री और कई अन्य राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उनकी कहानी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म “फॉरेस्ट मैन” भी बन चुकी है। लेकिन इन सबके बावजूद वह आज भी सादगी से माजुली में रहते हैं और पेड़ लगाने का काम जारी रखे हुए हैं।
प्रेरणा का स्रोत
जादव पायेंग का संदेश साफ है: “अगर एक आदमी अकेले इतना बड़ा जंगल बना सकता है, तो हम सब मिलकर पूरी धरती को हरा-भरा कर सकते हैं।” उनकी यह कहानी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हर किसी को प्रेरित करती है।
आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई से जूझ रही है, जादव पायेंग जैसे लोग हमें याद दिलाते हैं कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
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यह समाचार जादव पायेंग के अदम्य साहस और पर्यावरण प्रेम को समर्पित है। उम्मीद है, यह कहानी पाठकों को प्रेरित करेगी।
Jadav Payeng: The man who created a forest legacy by planting a tree every day for 37 years