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देवघर का जायका बनेगा ग्लोबल: बिना पानी के पकने वाले ‘अट्ठे मटन’ को जल्द मिलेगा GI टैग

देवघर: झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर अब केवल बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए ही नहीं, बल्कि अपने एक खास लजीज व्यंजन के लिए भी दुनिया भर में मशहूर होने जा रही है। देवघर के प्रसिद्ध ‘अट्ठे मटन’ (Atthe Mutton) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (GI Tag) मिलने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है। जीआई टैग मिलने के बाद यह डिश एक ग्लोबल ब्रांड बन जाएगी।

क्या है ‘अट्ठे मटन’ की खासियत?

सामान्य तौर पर बनने वाले मटन से ‘अट्ठे मटन’ की रेसिपी बिल्कुल अलग और अनोखी है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बनाने में पानी, प्याज और लहसुन का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता है।

  • धीमी आंच का जादू: इसे लोहे की कड़ाही में शुद्ध घी के साथ लगभग 3 घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है।
  • शुद्धता का पैमाना: 1 किलो मटन तैयार करने में लगभग 300 से 400 ग्राम शुद्ध घी का उपयोग होता है।
  • परोसने का अंदाज: स्वाद और सुगंध को बरकरार रखने के लिए इसे विशेष तौर पर मिट्टी के बर्तन यानी कुल्हड़ में ही परोसा जाता है।

देश-विदेश तक पहुंच रही है इसकी खुशबू

देवघर का अट्ठे मटन बनाने वाले होटल संचालक ने बताया कि इसकी शुरुआत देवघर से हुई थी, लेकिन अब इसकी मांग दूसरे राज्यों और विदेशों तक पहुंच गई है। देवघर आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इस खास डिश का स्वाद चखना नहीं भूलते। कई लोग तो इसकी रेसिपी जानने के लिए भी उत्सुक रहते हैं।

झारखंड के इन 9 उत्पादों की कतार में ‘अट्ठे मटन’

झारखंड राज्य गठन के बाद अब तक केवल सोहराई पेंटिंग को ही जीआई टैग मिल पाया है। लेकिन अब झारखंड सरकार और नाबार्ड (NABARD) के प्रयासों से 9 उत्पादों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है।

इन उत्पादों को भी मिल सकता है GI टैग:

  1. अट्ठे मटन (देवघर)
  2. कुचाई हल्दी (सरायकेला)
  3. बीरू गमछा (सिमडेगा)
  4. मीठी इमली (सिमडेगा)
  5. करणी शॉल (खूंटी) …सहित अन्य उत्पाद।

जीआई टैग (GI Tag) से क्या होगा फायदा?

जीआई टैग मिलने से किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी उत्पत्ति के स्थान की प्रामाणिकता तय होती है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद की कीमत बढ़ती है, बल्कि इसे बनाने वाले कारीगरों और स्थानीय विक्रेताओं की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार आता है।

विशेष: क्या होता है GI टैग और क्यों है यह जरूरी?

GI टैग (Geographical Indication) यानी ‘भौगोलिक संकेतक’ एक ऐसा नाम या चिन्ह है जो उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और उस स्थान की वजह से ही उनमें खास गुण या प्रतिष्ठा होती है।


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